PM Van Dhan yojana: प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू की जबर्दस्त योजना, इन्हें मिलेगा सीधा लाभ

PM Van Dhan Yojana: पीएम वन धन योजना क्या है. यह योजना इस योजना का इस्तेमाल करके कैसे आदिवासी बढ़ा सकते है. अपनी आमदनी और सरकार कि किस योजना के तहत आदिवासियों की मदद करने की पहल की गई है. प्राप्त करें जानकारी.

PM Van Dhan yojana

PM Van Dhan yojana: प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू की जबर्दस्त योजना, इन्हें मिलेगा सीधा लाभ

प्रधानमंत्री ने आदिवासियों की आमदनी को बढ़ाने के लिए एक योजना की शुरुआत की है. इस योजना का नाम PM Van Dhan Yojana रखा गया है. इस योजना के माध्यम से आदिवासियों को आर्थिक मदद प्राप्त करने की सरकार के द्वारा पहल की गई है.भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा भोपाल में बिरसा मुंडा के जयंती पर राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस सम्मेलन को संबोधित करते हुए उनके द्वारा बहुत सारी योजनाओं की घोषणा की गई. मोदी जी ने अपने दिए भाषण में प्रधानमंत्री वन धन योजना की बात कही उन्होंने कहा कि लोगों के मन में यह प्रश्न आएगा कि आखिर में वन धन योजना क्या है. तो इस योजना के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको हमारा यह पूरा लेख पढ़ना चाहिए.

PM Van Dhan Yojana क्या है

14 अप्रैल 2018 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा जनजातीय मामलों के मंत्रालय के साथ केंद्रीय स्तर पर नोडल विभाग के रूप में और राष्ट्रीय स्तर पर नोडल एजेंसी के रूप में इस योजना को शुरू किया गया इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है. जनजातीय समूह के लोगों का संपूर्ण विकास करना है. ताकि वह अपना जीवन अच्छे से व्यतीत कर सकें इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह भी है. कि आदिवासी लोगों को आमदनी के साधन प्रदान किए जाएं ज्यादातर आदिवासी अपने आर्थिक जरूरतों और बाकी जरूरतों के लिए  जंगलों पर निर्भर करते है.

प्रधानमंत्री जी के द्वारा यह कोशिश की गई है. कि आदिवासियों को उनकी जड़ों सेना अलग करके उनकी जड़ों के साथ जोड़ करके ही उनके आमदनी के जरिए को बढ़ाया जाए प्रधानमंत्री जी का मानना है. कि वन धन योजना के तहत आदिवासी लोगों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और उनका जीवन अच्छे से बीत पाएगा. इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में वनों से ढके हुए जनजातीय जिलों में वंदन विकास केंद्रों की स्थापना भी की जाने की कोशिश है.

 ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा प्रधानमंत्री वन धन योजना से.

 हम आपको बता दें कि आदिवासी मंत्रालय की तरफ से प्रत्येक घने वनों वाले इलाकों में जनजातीय समुदाय विकास केंद्र को बनाया जाएगा.केंद्र सरकार की इस योजना में देश के जनजातीय क्षेत्रों में 50000 बंधन विकास केंद्र बनाए जाएंगे. इसे आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उत्पन्न होंगे इस योजना में अब तक कुल मिलाकर 148 सरकारी वर्धन केंद्र खोले जा चुके है. जहां पर आदिवासी जनजाति के लोगों द्वारा बनाई हुई चीजों की बिक्री की जाती है.

 वन धन योजना के अंतर्गत चीजों का निर्माण कैसे किया जाएगा.

PM Van Dhan Yojana के तहत फलों से कैंडी बनाना जैसे आग लगने से अदरक अंजीर और इमली के अलावा फलों के रस से जूस और स्पेस बनाना इसके अलावा जंगलों से प्राप्त मसालेदार और गिलोय से संबंधित उत्पादों को एक विस्तृत श्रृंखला में संशोधित करते हुए बंधन विकास केंद्रों पर पैक किया जाएगा. और इन्हें ट्राइब इंडिया आउटलेट्स के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन बेचा जाएगा.इस प्रकार की जो भी आमदनी होगी उसे आदिवासी क्षेत्रों को डिवेलप करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

वन धन योजना का मुख्य उद्देश्य आदिवासी लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना है. इस योजना के तहत महुआ के फूल गिलोय मधुमक्खियों का पालन इत्यादि शामिल किया गया है. आदिवासी क्षेत्रों में जो भी चीजें प्रकृति के द्वारा प्रदान की जाती है. उन क्षेत्रों को इकट्ठा करके सरकारी योजना के तहत भेजना इस योजना का मुख्य हिस्सा है. इन चीजों को बेच करके जो भी आमदनी प्राप्त होती है. आदिवासी लोगों के विकास के लिए खर्च की जाती है.

  PM Van Dhan Yojana 2021

वन धन योजना जनजातीय मामलों के मंत्रालय और आदिवासी क्षेत्र के लोगों को आजीविका उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. और उन्हें बनाने के लिए प्रेरित किया गया है. विकास के लिए आदिवासी जिलों में काम करना है. एक केंद्र के साथ आदिवासी सहायता समूह काम करते है. और प्रत्येक समूह में 20 आदिवासी युवा जुड़े हुए होते है. प्रबंधन केंद्र से 300 लोग जुड़े हुए है. आदिवासी लोगों को आजीविका और सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय संगठन के रूप में ट्राई योजना के कारण के लिए नोडल एजेंसी स्थापित की गई है. सहायता प्रदान करने का कर रही है.

हम आपको बता दें कि इस योजना के तहत अब तक आदिवासी क्षेत्रों में 1126 और देशभर में भी शुरू किए गए है. इस योजना के तहत दशमलव 600000 लोगों को लाभ प्राप्त हो रहा है. इस योजना का पहला परिणाम 2020 में देखा गया था आपको बता दें कि उस समय महुआ और गिलोय प्रमुख न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ 5000000 रुपए की आमदनी हुई थी आदिवासियों के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित हुई है.

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