जानें समास क्या होते हैं? जानें समास के कितने भेद होते हैं? | Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain

हिंदी व्याकरण एक बहुत बड़ा क्षेत्र है जिसके अंतर्गत बहुत से विषय आते हैं। आज के कार्यक्रम में हम आपको बताएंगे किस समास किसे कहते हैं, समास क्या होता है? समास के कितने भेद होते हैं? आज हम स्टेप्स में जानेंगे

समास किसे कहते हैं? समास के कितने भेद होते हैं (Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain)

जब दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से एक नया शब्द उत्पन्न होता है तो इसे समास कहते हैं। सरल भाषा में कहें तो जब दो सब आपस में मिलते हैं या दो से अधिक शब्द आपस में मिलते हैं एक नए शब्द की उत्पत्ति होती है जिसे समास कहते हैं। कम शब्दों का प्रयोग करके एक बड़े अर्थ को बताना ही समास कहलाता है।

समास के कुछ उदाहरण

  • चित्रकार- चित्र बनाने वाला
  • कामचोर- काम से डरने वाला
  • दशक-10 वर्षों का एक समूह
  • रसोईघर-भोजन बनाने के लिए कमरा

समास के कितने भेद होते हैं?

हम जानेंगे समाज के कितने भेद होते हैं भेद से इसका अर्थ है इसके कितने प्रकार होते हैं। मुख्यतः समास के 6 भेद माने जाते हैं। जो निम्न प्रकार हैं-

  • अव्ययीभाव समास
  • तत्पुरुष समास
  • कर्मधारय समास
  • द्विगु समास
  • द्वंद समास
  • बहुव्रीहि समास

1) अव्ययीभाव समास

जिस भी समास का पहला पद(पूर्व पद) प्रधान हो और वह अव्यय हो उसे अव्ययीभाव समास कहा जाता हैं। जैसे – यथामति (मति के अनुसार), आमरण (मृत्यु तक) इनमें यथा और आ अव्यय हैं।

उदाहरण: आजीवन-जीवनभर

2) तत्पुरुष समास

जिस भी समास का उत्तरपद प्रधान हो और पूर्वपद गौण हो उसे तत्पुरुष समास कहा जाता हैं।

उदाहरण: तुलसीदासकृत-तुलसीदास द्वारा कृत (रचित)

3) कर्मधारय समास

जिस भी समास का उत्तरपद प्रधान हो और पूर्वपद व उत्तरपद में विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहा जाता है।

उदाहरण: चंद्रमुख-चंद्र जैसा मुख, पीतांबर-पीला अंबर (वस्त्र)

4) द्विगु समास

जिस भी समास का पूर्वपद संख्यावाचक विशेषण हो उसे द्विगु समास कहा जाता हैं। इससे समूह अथवा समाहार का बोध होता है।

उदाहरण: नवग्रह-नौ ग्रहों का समूह, त्रिलोक-तीन लोकों का समाहार

5) द्वंद समास

जिस भी समास के दोनों पद प्रधान होते हैं और उनके विग्रह करने पर ‘और’, अथवा, ‘या’, एवं शब्द लगते हैं, उन्हें द्वंद्व समास कहते है

उदाहरण: पाप-पुण्य-पाप और पुण्य, ऊँच-नीच -ऊँच और नीच

6) बहुव्रीहि समास

जिस भी समास के दोनों पद अप्रधान होते हों और समस्तपद के अर्थ के अतिरिक्त कोई सांकेतिक अर्थ प्रधान हो, तो उसे बहुव्रीहि समास कहा जाता हैं।

उदाहरण: दशानन-दश है आनन (मुख) जिसके अर्थात् रावण, नीलकंठ-नीला है कंठ जिसका अर्थात् शिव

इन उदाहरणों की मदद से आप आसानी से समझ सकते हैं कि समास क्या है और उसके 6 भेदों को भी आप यहां समझ सकते हैं।
आशा करते हैं हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपके काम आई होगी। आज हमने जाना समास क्या होता है और समास के कितने भेद होते हैं।

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