Vicky Ostwal Cricketer Biography: Stats | Age | Family | Bowling Style

Vicky Ostwal Cricketer Biography: मेहनत, अनुशासन और दृढ़ता के दम पर इंसान जीवन में अपने सारे सपने हकीकत म तब्दील कर सकता है। हर इंसान के लिए अपने लक्ष्य के प्रति करने वाली मेहनत की एक अलग महत्वाकांक्षा और परिभाषा होती है। और जब आप अपने आप को अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित कर चुके हों तो आप फिर किसी भी प्रकार विषम परिस्थिति को भी पराजित कर पाएंगे। लेकिन ज़रूरत है एक सोच की, एक ऐसी सोच जो रोज़ आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे। आज हम अपने इस लेख में ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में बात करने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी सफलता की कहानी मुंबई की लोकल ट्रेन में लिखी। आज हम अपने लेख आपको बताएंगे हमारे देश के उभरते हुए एक युवा क्रिकटर विक्की ओस्तवाल के बारे में जिन्होंने बेहद ही कम उम्र में क्रिक्रेट की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना ली है।

Vicky Ostwal Cricketer Biography: Stats | Age | Family | Bowling Style

Vicky Ostwal Cricketer Biography

विक्की ओस्तवाल का जन्म 1 सितंबर 2002 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ। विक्की दाएं हाथ के बल्लेबाज होने के साथ ही बाएं हाथ के स्पिनर गेंदबाज हैं। ICC UNDER-19 WORLD CUP में विक्की को भारतीय टीम में एक गेंदबाज के रूप में चुना गया है।

ICC UNDER-19 WORLD CUP में भारत अपना दमदार प्रदर्शन दिखा चुका है। कप्तान यश ढुल के नेतृत्व में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका की टीम को धूल चटा दी। ढुल और विक्की की जोड़ी ने इस जीत में अहम भूमिका निभाई। जहां एक ओर यश ढुल के बल्ले ने 82 रन बटोरे तो वहीं विक्की ने अपनी उंगलियों से बॉल को स्पिन करवा मात्र 28 रन देकर 5 विकेट चटका दिए। विक्की को इस मैच का मैन ऑफ द मैच भी चुना गया था।

आसान नहीं रहा यह तक का सफर

विक्की ओस्तवाल का यहां तक का यह सफ़र काफी संघर्षों से भरा हुआ रहा है। विक्की ने 9 साल की उम्र से ही बल्ला थाम लिया था। उस समय विक्की वेंगसरकर अकादमी में क्रिकेट खेलने के लिए मुंबई जाया करते थे। 9 वर्षीय विक्की हर रोज़ लोकल ट्रेन में सफर तय कर के लोनवाला से मुंबई जाते थे। विक्की ने अपने पिता के साथ तीन से चार साल तक लोकल ट्रेन में सफर किया ताकि वह रोज़ अपने लक्ष्य के और नजदीक पहुंच पाएं। लेकिन विक्की की अधिकतम ऊर्जा इस सफर में ही खर्च हो जाती थी। यह देख विक्की के कोच मोहन जाधव ने विक्की के पिता को यह सुझाव दिया कि वह अकादमी के पास ही किसी जगह स्थानांतरित हो जाएं जिससे विक्की का सफर का वक़्त भी बच जाएगा और वह अपने खेल पर अधिक केंद्रित हो पाएगा। कोच के इस सुझाव पर अमल कर विक्की के पिता परिवार समेत पुणे शिफ्ट हो गए। विक्की का परिवार पुणे में ही किराए के एक घर में रहने लगा जहां से विक्की का एक नया सफर शुरू हुआ।

19 वर्षीय इस खिलाड़ी ने UNDER 19 ASIA CUP में भारत को जिताने में भी एहम भूमिका निभाई थी। एशिया कप के फाइनल मैच में भारत को भिड़ंत श्रीलंका से हुई थी जिसमें विक्की ने 3 विकेट झटक कर बाजी मार ली थी। अगर आज विक्की इस मुकाम पर पहुंच कर देश का नाम रोशन कर रहें हैं और अपने खेल और हुनर का प्रदर्शन कर रहें हैं तो उसके पीछे वजह है उनका त्याग, उनकी मेहनत और उनका परिवार जिन्होंने विक्की का हर राह पर साथ दिया जिससे विक्की ज़िन्दगी की हर बाउंसर पर चौके छक्के जड़ पाएं।

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